रवीश कुमार का प्राइम टाइम शरू होते ही ,केवल ऑपरेटर रविश की आवाज कर देते हैं बंद..!!

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रवीश कुमार एक ऐसे पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं जिनको सदैव से भारतीय जनता पार्टी और दक्षिणपंथी विचारधारा का विरोध करने वाले पत्रकार के रूप में जाना जाता है यद्यपि पत्रकार काशी संतुलन बनाकर अपना कार्य करते हैं और उनकी कोई विचारधारा नहीं होती परंतु व्यक्तिगत जीवन में रवीश कुमार वामपंथ समर्थक हैं और यही कारण है कि वह दक्षिणपंथी विचारधारा वाले किसी भी व्यक्ति का विरोध करते हैं.



परंतु इसमें रवीश कुमार ने अपना अलग ही दुखड़ा रोया है यह दुखड़ा उन्होंने Facebook पर रोया है और बताया है कि उनके द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम के प्रसारण के समय बहुत सारी केबल ऑपरेटर उनकी आवाज यादव बंद कर देते हैं या NDTV का प्रसारण रोक देता है. ऐसा क्यों हो रहा है इसका जवाब भी उन्होंने स्वयं ही दे दिया और आश्चर्य वाली बात तो यह रही कि इसके साथ ही साथ उन्होंने एक बार फिर से पत्रकार की छवि के पीछे छुपे अपनी राजनैतिक महत्वकांक्षाओं को जगजाहिर कर दिया.

रवीश कुमार ने लिखा:-

लोगों ने लिखा है कि…जब भी प्राइम टाइम शुरू होता है केबल पर आवाज़ ग़ायब कर दिया जाता है। बीच कार्यक्रम से सब कुछ चला …

Posted by Ravish Kumar on jueves, 8 de marzo de 2018

“लोगों ने लिखा है कि…

जब भी प्राइम टाइम शुरू होता है केबल पर आवाज़ ग़ायब कर दिया जाता है। बीच कार्यक्रम से सब कुछ चला जाता है। ऐसा क्यों हो रहा है? क्या केबल वाले किसी के इशारे पर काम करते हैं?

झारखंड में डीआरडीए के कर्मचारियों को सात महीने से वेतन नहीं मिला है।

बिहार हैंडलूम कारपोरेशन के कर्मचारियों को कई महीनों से सैलरी नहीं मिल रही है। लिखने वाले तो लिखा है कि कई महीने बल्कि कई साल से नहीं मिला है।

आज़मगढ़ के कई बैंकों में कैश की भारी किल्लत हो गई है। कई दिनों से इसके कारण ग्राहकों और बैंकरों के बीच बहसा-बहसी हो रही है।

खगड़िया के गांव बेला सिमरी में उज्ज्वला योजना के ग्राहकों को भी गैस का सिलिंडर 940 का मिल रहा है।

एक ग्राहक ने लिखा है कि स्टेट बैंक आफ इंडिया के उसके अकाउंट से 500 रुपये डेबिट हो गए। पता किया तो दुर्घटना बीमा हो गया है। बिना उसकी अनुमति के। उसे बैंक जाकर अप्लिकेशन देकर आना पड़ा है कि बीमा बंद हो। बिना उसकी जानकारी और अनुमति के बीमा कंपनी की जेब में 500 चला गया।

पंजाब में सर्वशिक्षा अभियान के तहत 2009 में 8000 शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। अब इनकी सैलरी कम कर तीन साल के प्रोबेशन पर भेजा जा रहा है। 42,800 की जगह तीन साल 10,800 की सैलरी पर काम करना होगा।

बिहार से एक महिला ने लिखा है कि वह 2010 से वेटनरी डाक्टर के रूप में कांट्रेक्ट पर काम कर रही हैं। उनकी सैलरी 29,500 है। हर साल तीन चार महीने की देरी से कांट्रेक्ट रिन्यू होता है। इस दौरान सैलरी नहीं मिलती है मगर काम करना पड़ता है। 2010 से लेकर 2018 तक सेवा में है फिर भी परमानेंट नहीं किया गया है। 2015 में परमानेंट वेकैंसी आई थी, कैंसिल हो गई। 2017 में आई उसका पता नहीं है। वो तीन चार अस्पताल देखती हैं यानी इतना काम है।

अर्थशास्त्र और राजनीति की किसी भी परिभाषा से इसे ग़ुलामी कहते हैं। मैंने कांट्रेक्ट पर काम करने वाले कई कर्मचारियों से बात की है। उन्हें इसके बाद भी हिन्दू मुस्लिम में रस आता है। राजनीति को भावुकता से देखते हैं। वो शोषित हैं मगर किसी और शोषित के प्रदर्शन में न जाएंगे न उसका समर्थन करेंगे।

आप अपने लिए नहीं जा सकते तो एक रास्ता बताता हूं। किसानों के प्रदर्शन में चले जाइये, एस एस सी के छात्रों के प्रदर्शन में चले जाइये। उन पर पोस्ट लिखते रहिए। नागरिक बनिए वरना नेता आपको झूठ बोलकर हिन्दू मुस्लिम के नाम पर कचरा बना देगा। ख़ुद से पूछिए कि क्या किसानों की हालत पर कभी एक पोस्ट लिखा है, कभी बोला है कि उनके साथ ग़लत हो रहा है।

आई टी सेल वाले तुरंत आए और इस पोस्ट के कमेंट में गाली देना चालू करें। बैंक सीरीज़ करना शुरू किया है तब से इनबाक्स में मां बहन की गालियां बढ़ गई हैं। तुम गुंडों की फौज हो आई टी सेल वालों। जिस दिन शादी करने जाओगे तो लड़की वालों को बता नहीं पाओगे कि एक पार्टी के आई टी सेल में काम करते हैं। लड़की ही उठकर चली जाएगी कि ये तो गुंडा है।”



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