देश में बहुत कुछ बदलाव आयेंगे अप्रैल के बाद

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अब केंद्र में भी सत्ता में आने के बाद और भारत के ज्यादातर इलाकों में अपनी सरकार बनाने के बाद भारतीय जनता पार्टी को आने वाले समय में और भी अधिक जिम्मेदारी भरे निर्णय लेने होंगे और आने वाला समय भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद ही जिम्मेदारी भरा होने वाला है क्योंकि विपक्ष तो अब ज्यादातर इलाकों में पूरी तरीके से खत्म हो चुका है तो अब वह सिर्फ विरोध के लिए विरोध की राजनीति करने पर उतर जाएगा और जिसका जवाब भारतीय जनता पार्टी को देना पड़ेगा इस बार उसको वह तमाम वादे हर हाल में पूरे करने ही होंगे जो उन्होंने भारत की जनता से 2014 में किए थे उसमें वह सभी हैं जिसके चलते प्रधानमंत्री मोदी की लहर बन पाई थी और उस तूफान में पूरा विपक्ष और कांग्रेस पूरी तरीके से उड़ गई थी सारे दावे धरे के धरे रह गए क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी की आंधी में विपक्ष पूरी तरीके से बह गया और खत्म हो गया.



क्या करना पड़ता है क्योंकि वह विचलित होते हैं और इसका ज्ञात हो कि राज्य सभा में अप्रैल के बाद संख्या के खेल में भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस से कहीं आगे निकल सकती है और इसके ही चलते अब राज्यसभा में भाजपा हावी हो रहे हैं विपक्ष की धार खत्म कर सकती है इसी के साथ निर्णय लेने और विधेयक को पारित करवाने में भारतीय जनता पार्टी आगे निकल जाएगी जिसमें वह तमाम विधेयक है जो भारत की राजनीति नहीं सांस्कृतिक दिशा और दशा को भी बदल देंगे और यही कारण है कि आपको हम बता दें कि इसी वर्ष अप्रैल में तमाम पार्टियों के 58 राज्य सभा के सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है

जिसके बाद राज्य सभा के गणित में बदलाव होना लगभग तय माना जा रहा है बड़े बदलाव के बाद जहां कांग्रेस नेतृत्व वाले विपक्ष की संख्या 123 से कम होकर 115 रहने की संभावना है वही भारतीय जनता पार्टी और उसके गठबंधन सहयोगी और समर्थकों का वर्तमान के 100 से बढ़कर 109 हो सकता है कुल 55 राज्य सभा सदस्य ऐसे हैं जो भाजपा की विरोधी दलों से हैं और 24 भाजपा के गठबंधन की पार्टियों से है कश्मीर अयोध्या के सबसे प्रमुख मुद्दों को सुलझाने और चुनाव से पहले किए गए वादे पर अमल करने की जिम्मेदारी होगी.

भारतीय जनता पार्टी के लिए आने वाला समय सच में काफी जिम्मेदारी से भरा हो सकता है 2019 अवसर पर है और सिर्फ 1 साल का समय अब बच गया है अब 365 दिनों में भारतीय जनता पार्टी को वह हर कार्य करना होगा जो उसको 2019 में फिर से प्रधानमंत्री मोदी की गद्दी को बचाने में सहायक साबित हो और प्रधानमंत्री मोदी को एक बार फिर से भारत का यशस्वी प्रधानमंत्री बनाने में सहयोगी सिद्ध हो सके.



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